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क्रिप्टोजैकिंग से बढ़ रहा साइबर क्राइम का ग्राफ

किप्टोजैकिंग ने हैकिंग की परिभाषा को बदलते हुए साइबर क्राइम के ग्राफ को बढ़ा दिया है। साइबर सुरक्षा से जुडी संस्थाओं ने सर्वेक्षण के आधार पर जानकारी साझा करने के साथ चिंता ज़ाहिर करते हुए बताया है की दुनियाभर में हुए साइबर हमलों में वर्ष 2018 में अबतक सबसे अधिक मामले दर्ज़ किये गए है। जो कि पिछले सालों की तुलना में 80 प्रतिशत से भी अधिक है। ट्रेन्ड माइक्रो इनकॉर्पोरेटेड नामक संस्था ने आंकड़ें जारी करते हुए बताया है की हैकर्स ने चोरी के ढंग में बदलाव किया है। वे मुख्य रूप से स्मार्टफोन यूज़र को मुख्य रूप से निशाना बना रहे है जो की क्रिप्टो माइनिंग में सक्रिय हैं।

धन और बहुमूल्य कंप्यूटिंग संसाधनों की चोरी

ग्लोबल साइबर सिक्युरिटी ट्रेन्ड माइक्रो इनकॉर्पोरेटेड ने हाल ही में जारी एक रिपोर्ट में खुलासा किया है कि वर्ष 2018 की पहली छमाही में अभी तक वैश्विक स्तर पर क्रिप्टोजैकिंग के मामले सामने आये है। जो की वर्ष 2017 के मुकाबले 80 फीसदी ज्यादा है। यहाँ साइबर अपराधियों ने अधिक गुप्त तरीकों पर ध्यान आकर्षित करने के लिए खुद को सुरक्षित रखते हुए रेंसोमवेयर हमलों से दूर रह रहे हैं। जबकि माइनिंग के दौरान धन और बहुमूल्य कंप्यूटिंग संसाधनों को चोरी करने की प्रक्रिया को जारी रख साइबर क्राइम के पीछे क्रिप्टोजैकिंग एक बड़ी वजह सामने आयी है।

बतौर क्रिप्टोवेस्ट क्रिप्टोजैकिंग को लेकर दुनियाभर की एजेंसियां साइबर क्राइम की स्थिति को लेकर चिंतित है। अमेरिका और चीन ने ऐसे हमलों को रोकने और मामलों की पहचान के लिए कुछ प्लेटफार्म तैयार किये थे। लेकिन वे सभी नाकाफी साबित हो रहे है, यही वजह है कि डेटा चोरी से लेकर धन चोरी की घटनाएं रोक पाना सम्भव नहीं हो पा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है, की दुनियाभर के लिए यह एक खतरा है जो की न सिर्फ व्यापारिक क्षेत्र को नुक्सान पहुंचा रहा है बल्कि व्यकित की निजी डेटा को भी लीक करने का काम कर रहा है।

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Ashwani is a content writer, journalist and RJ. His words have touched millions over the past one decade through his articles and radio presentations. On OWLT Market, he is reaching out to Hindi readers.

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